Friday, November 24, 2023

मुक्तक 'दोस्त'

 "पुण्यतिथि पर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि"

कोई प्यारा जब दुनिया को, छोड़ अचानक जाता है।

टीस हृदय में रह रह उठती, याद वही बस आता है।

कैसे भूलूँ उन लम्हों को, साथ बिताये जो हमने,

तुमको खोना हद से ज्यादा, यार मुझे तड़पाता है।।


शुचिता अग्रवाल 'शुचिसंदीप'

तिनसुकिया, असम


Thursday, November 23, 2023

मुक्तक, माँ

 माँ तेरी सूरत आँखों से, ओझल हो ना पाती है।

नहीं एक दिन ऐसा जिस दिन, याद न तेरी आती है।

तीन बरस यूँ बीते तुम बिन, जैसे सदियाँ बीत गयी,

मेरी भीगी आँखों को भी, याद तुम्हारी भाती है।।

Wednesday, September 27, 2023

त्रिभंगी छंद 'ससुराल'

 त्रिभंगी छंद

 'ससुराल'


ससुराल सजीला, लगे रसीला, छैल-छबीला, यौवन सा।

अति हृदय लुभाता, सहज सुहाता, मन हर्षाता, उपवन सा।।

कोमल भावों का, मृदु छाँवों का, उच्छावों का, डेरा है।

सूरज की गरमी, शीतल नरमी, उत्सवधर्मी, घेरा है।।


मन श्वसुर भाँपते, हृदय झाँकते, घर सँवारते, बड़पन से।

दुख सास मिटाती, हरि गुण गाती, दीप जलाती, शुचि मन से।।

नखराला देवर, मीठा घेवर, तीखा तेवर, दिखलाये।

ननदल हमजोली, हँसी-ठिठोली, मीठी बोली, सिखलाये।।


पिय का घर आना, मन खिल जाना, कुछ उकसाना, सरसाना।

तन रिमझिम सावन, अति मनभावन, मन वृंदावन, बरसाना।।

प्रिय की मृदु बातें, मीठी रातें, सुख सौगातें, व्याकुलता।

नेहर बिसराये, नव घर पाये, सपन सजाये, चंचलता।।


ससुराल प्रेम भी, ठोस-हेम भी, कुशल-क्षेम भी, प्यारा है।

हर भूल भुलाता, गले लगाता, हर्ष जगाता, न्यारा है।।

नित पाठ पढ़ाता, गर्व बढ़ाता, चाव चढाता, घर अपना।

हम इसे सजायें, हिल-मिल जायें, मंगल गायें, हो सपना।।


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त्रिभंगी छंद विधान-


त्रिभंगी प्रति पद 32 मात्राओं का सम पद मात्रिक छंद है। प्रत्येक पद में 10, 8, 8, 6 मात्राओं पर यति होती है। यह 4 पद का छंद है। प्रथम व द्वितीय यति समतुकांत होनी आवश्यक है। परन्तु तीनों यति निभाई जाय तो सर्वश्रेष्ठ है। दो दो चरण समतुकांत होते हैं।


इसकी मात्रा बाँट निम्न प्रकार से है:-

प्रथम यति- 2+4+4

द्वितीय यति- 4+4

तृतीय यति- 4+4

पदान्त यति- 4+2

चौकल में पूरित जगण वर्जित रहता है तथा चौकल की प्रथम मात्रा पर शब्द समाप्त नहीं हो सकता।


पदान्त में एक दीर्घ (S) आवश्यक है लेकिन दो दीर्घ हों तो सौन्दर्य और बढ़ जाता है


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शुचिता अग्रवाल, 'शुचिसंदीप'

तिनसुकिया, असम

Monday, March 27, 2023

अवतार छंद, 'गोरैया'

 अवतार छंद,

 'गोरैया'

फुर फुर गोरैया उड़े, मदमस्त सी लगे।

चीं चीं चीं का शोर कर, नित भोर वो जगे।।

मृदु गीत सुनाती लहे, वो पवन सी बहे।

तुम दे दो दाना मुझे, वो चहकती कहे।।


चितकबरा तन, पर घने, लघु फुदक सोहती।

अनुपम पतली चोंच से, जन हृदय मोहती।।

छत, नभ, मुँडेर नापती, नव जोश से भरी।

है धैर्य, शौर्य से गढ़ी, बेजोड़ सुंदरी।।


ले आती तृण, कुश उठा, हो निडर भीड़ में।

है कार्यकुशलता भरी, निर्माण नीड़ में।।

मिलजुल कर रहती सदा, व्यवहार की धनी।

घर-आँगन चहका रही, मृदु भाव से सनी।।


सुन मेरी प्यारी सखी, तुम सुखद भोर हो।

निज आँगन समझो इसे, घर यही ठोर हो।।

मैं दाना दूँगी तुम्हें, जल नित्य ही भरूँ।

मत जाना दर से कभी, 'शुचि' विनय नित करूँ।।


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अवतार छंद विधान-


अवतार छंद 23 मात्रा प्रति पद की सम मात्रिक छंद है।

यह 13 और 10 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहती है।  दो दो या चारों पद समतुकांत होते हैं।


इसका मात्रा विन्यास निम्न है-

2 2222 12, 2 3 212 


चूंकि यह मात्रिक छंद है अतः 2 को 11 में तोड़ा जा सकता है, किंतु आदि द्विकल एवं अंत 212 (रगण) अनिवार्य है। अठकल के नियम अनुपालनिय है।

Wednesday, March 1, 2023

संपदा छंद 'श्री गणेशाय नमः'

 संपदा छंद

 'श्री गणेशाय नमः'


हे वरगणपति देव, शिव-गौरी सुत सुजान।

श्री कार्तिकेय भ्रात, जगत करे गुण बखान।।

गज मुख दुर्लभ रूप, है काया अति विशाल।

शशि मष्तक पर सोय, अति सुंदर दिव्य भाल।।


तिथि भाद्र शुक्ल चौथ, जन्मे प्रभु श्री गणेश।

है आह्लादित मात, नाचे छम छम महेश।।

तन पीताम्बर सोय, तुण्ड बड़ी है विशाल।

गल मणि माला दिव्य, आकर्षक सौम्य चाल


हो प्रथम पूज्य आप, करें सफल सकल काज।

दुख हरते प्रभु शीघ्र, रखते तुम भक्त लाज।।

हे भूपति विघ्नेश, सब देवों के नरेश।

तन मन धन से भक्त, ध्याते प्रतिपल गणेश।।


हे मेरे आराध्य, नमन करूँ नित विनीत।।

सद्ग्रन्थों को राच, कार्य करूँ मैं पुनीत।

कर लेखन गति तेज, भर दो हिय में उजास।

'शुचि' आँगन में आप, करना प्रभु नित्य वास।।


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संपदा छंद विधान-


संपदा छंद 23 मात्रा प्रति पद की सम मात्रिक छंद है।

यह 11 और 12 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहती है।  दो दो या चारों पद समतुकांत होते हैं।


इसका मात्रा विन्यास निम्न है-

2 22221, 2222 121


चूंकि यह मात्रिक छंद है अतः 2 को 11 में तोड़ा जा सकता है, किंतु आदि द्विकल एवं अंत 121 (जगण) अनिवार्य है। अठकल के नियम अनुपालनिय है।

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शुचिता अग्रवाल 'शुचिसंदीप'

तिनसुकिया, असम

Sunday, November 20, 2022

निश्चल छंद, 'ऋतु शीत'

 निश्चल छंद,

 'ऋतु शीत'


श्वेत अश्व पर चढ़कर आई, फिर ऋतु शीत।

स्वागत करने नवल भोर का, आये मीत।।

गिरि शिखरों पर धवल ओढ़नी, दृश्य पुनीत।

पवन प्रवाहित होकर गाये, मधुरिम गीत।।


शिशिर आगमन पर रिमझिम सी, है बरसात।

अगुवाई कर स्वच्छ करे ज्यूँ, वसुधा गात।।

प्रेम प्रदर्शित करती मिहिका, किसलय चूम।।

पुष्प नवेले ऋतु अभिवादन, करते झूम।


रजत वृष्टि सम हिम कण बरसे, है सुखसार।

ग्रीष्म विदाई करके नाचे, सब नर-नार।।

दिखे काँच सम ताल सरोवर, अनुपम रूप।

उस पर हीरक की छवि देती, उजली धूप।।


होता है आतिथ्य चार दिन, फिर है रोष।

शरद सुंदरी में दिखते हैं, अगणित दोष।।

घिरा कोहरा अविरत ठिठुरन, कम्पित देह।

छूमंतर हो जाता पल में, यह ऋतु नेह।।

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निश्चल छंद विधान-


निश्चल  छंद 23 मात्रा प्रति पद की सम मात्रिक छंद है।

यह 16 और 7 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहती है।  दो दो या चारों पद समतुकांत होते हैं।


इसका मात्रा विन्यास निम्न है-

2222 2222, 22S1


चूंकि यह मात्रिक छंद है अतः 2 को 11 में तोड़ा जा सकता है, किंतु अंत गुरु लघु अनिवार्य है।

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शुचिता अग्रवाल 'शुचिसंदीप'

तिनसुकिया, असम

Tuesday, October 18, 2022

लावणी छंद, 'हिन्दी'

  "हिन्दी" 

लावणी छंद


भावों के उपवन में हिन्दी, पुष्प समान सरसती है।

निज परिचय गौरव की द्योतक, रग-रग में जो बसती है।।

सरस, सुबोध, सुकोमल, सुंदर, हिन्दी भाषा होती है।

जग अर्णव भाषाओं का पर, हिन्दी अपनी मोती है।।


प्रथम शब्द रसना पर जो था, वो हिन्दी में तुतलाया।

हँसना, रोना, प्रेम, दया, दुख, हिन्दी में खेला खाया।।

अँग्रेजी में पढ़-पढ़ हारे, समझा हिन्दी में मन ने।

फिर भी जाने क्यूँ हिन्दी को, बिसराया भारत जन ने।।


देश धर्म से नाता तोड़ा, जिसने निज भाषा छोड़ी।

हैं अपराधी भारत माँ के, जिनने मर्यादा तोड़ी।।

है अखंड भारत की शोभा, सबल पुनीत इरादों की।

हिन्दी संवादों की भाषा, मत समझो अनुवादों की।।


ये सद्ग्रन्थों की जननी है, शुचि साहित्य स्त्रोत झरना।

विस्तृत इस भंडार कुंड को, हमको रहते है भरना।।

जो पाश्चात्य दौड़ में दौड़े, दया पात्र समझो उनको।

नहीं नागरिक भारत के वो, गर्व न हिन्दी पर जिनको।।


शुचिता अग्रवाल 'शुचिसंदीप'

तिनसुकिया, असम

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