Saturday, November 9, 2019

राधेश्यामी छन्द,'जब-जब भक्तन से मिलने को'

(16 मात्राएं प्रति चरण)

जब-जब भक्तन से मिलने को,धरती पर अंबे आती है।
खिल जाते मुखड़े भक्तों के,ऐसी खुशियाँ माँ लाती है।

शैलसुता अरु ब्रह्माचारिणी,चन्द्रघण्टा कुष्मांडा हे माँ।
स्कंदरूपिणी कात्यायिनी,हे कालरात्रि स्वरूपा माँ।
हे महागौरी हे सिद्धिदात्री,तू स्वर्ग धरा पर लाती है।
जब-जब भक्तन से मिलने को,धरती पर अंबे आती है।

अँधियारा जग का मिट जाता,नवरातें रोशन होती है।
सब जागे दुर्लभ दर्शन को,मन में जलती एक ज्योति है।
माँ के भजनों में अमृत की,धारा सबको मिल जाती है।
जब-जब भक्तन से मिलने को,धरती पर अंबे आती है।

है आम्रपत्र की वन्दनवारें, हर गाँव नगर गलिहारे पर।
खुश होकर माता देख रही,जब झूमे दुनिया गरवे पर।
मंगलगीतों की धुन पर माँ, भक्तों को खूब नचाती है।
जब-जब भक्तन से मिलने को,धरती पर अंबे आती है।

#स्वरचित#मौलिक
सुचिता अग्रवाल"सुचिसंदीप"
तिनसुकिया, असम
Suchisandeep2010@gmail.com

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