Wednesday, November 6, 2019

मुक्त कविता,' नया ये साल आया है"


नये सपने नयी राहें नया ये साल आया है।
हमारे देश में बदलाव का ये दौर आया है।

करें सहयोग हम मिलकर बनें हम देश की ताकत,
जगो अब नींद से अपनी सवेरा खास आया है।

चलो हम ख्वाब को अपने पुरा इस साल करते हैं,
मिटादें आपसी रंजिश सृजन में प्यार भरते हैं।

गिरादो आज उस दिवार को जो मार्ग में बाधित,
चलो हम भूलकर दुःख को खुशी के गीत गाते हैं।

दिखाएँगे नये युग को कलम में जोर कितना है,
हमारी बाजुओं में दम दिखाएँगे कि कितना है।

बढ़ो शब्दों की ताकत से हमें आवाज उठानी है,
सुनादो गैर मुल्कों को कि भारत वीर कितना है।

कभी हम डूबकर इसमें दिलों के भाव लिखते हैं,
कभी कुछ खास देखें तो कलम से आह भरते हैं।

सिपाही हम भी हैं इस देश के हाथों में स्याही है,
चलो इस साल भारत का नया इतिहास रचते है।।

विद्यावाचस्पति सुचिता अग्रवाल 'सुचिसंदीप'
तिनसुकिया(आसाम)

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